Roshni Ke Us Paar…. !!

 

 

रौशनी के उस पार दूर तक जाता था वो रास्ता,
बोहोत खूबसूरत था वो रास्ता |
ऐसे परिंदे मैंने पहले कभी नहीं देखे थे,
दरख्तों की टहनियां मुझसे कुछ कहना चाहती थीं,
मगर मैं कुछ सुन न पाया |
बेइंतेहा सुकून वाला और अकेला था वो रास्ता,
रौशनी के उस पार दूर तक जाता था वो रास्ता ||

 

रौशनी के उस पार लोग भी बोहोत कम थे,
एक तेज था उनके चेहरे पे |
सुर्ख आँखों से एक ने मेरी तरफ देखा, और आगे चल दिया,
कुछ नहीं कहता था, जो पकड़ता था वो रास्ता,
रौशनी के उस पार दूर तक जाता था वो रास्ता ||

 

बोहोत खुश थे वो लोग,
कोई तकलीफ न थी उन्हें,
न तो सुनते देखा, और न कुछ कहते सुना उन्हें |
मानो वक़्त थम सा गया हो, और हवाओं के पैर छू रहा था वो रास्ता,
रौशनी के उस पार दूर तक जाता था वो रास्ता ||

 

मैं आगे चलता रहा, बोहोत दूर निकल गया था,
जाना कहाँ है कुछ पता नहीं था |
उस रास्ते पर चलने वाले लोग भी अब कम हो गए थे,
जिस तरह “ज़िन्दगी” में एक एक कर सब “पवार” को छोड़ गए थे |
“बेबाक” सा चले जा रहा था, और मुझे पनाह दिए जा रहा था वो रास्ता,
रौशनी के उस पार दूर तक जाता था वो रास्ता ||

बेबाक: Fearless


 

©Nitin Pawar

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